तमाम बुर्जुआ दक्षिणपंथी पार्टियों, नेताओं, मोर्चों के ख़िलाफ़
मज़दूर, मेहनतकश और क्रान्तिकारी युवा, लेफ्ट ब्लॉक् में संगठित हों!
WSP ने जिस 'लेफ्ट ब्लॉक्' का प्रस्ताव रखा है:
http://workersocialist.blogspot.com/2018/06/2019.html
यह प्रस्ताव क्या है, उसके राजनीतिक निहितार्थ क्या हैं, उसकी भूमिका क्या होगी और कैसे वह पहले से मौजूद वाम मोर्चे से भिन्न है आदि बहुत से प्रश्न युवा कम्युनिस्ट साथियों द्वारा पूछे जा रहे हैं. इन प्रश्नों को स्पष्ट करते हुए हम यह प्रश्नोत्तरी प्रकाशित कर रहे हैं!
_______________________
प्रश्न- जिस लेफ्ट ब्लॉक् की आप बात कर रहे हैं, उसका कांसेप्ट क्या है?
उत्तर- पूंजीवाद की ढहती-गिरती राजनीतिक व्यवस्था को, फासिस्टों ने चार साल किसी तरह सहारा दिए रखा। अब वे चुक गए हैं। उपचुनावों के नतीजे बता रहे हैं कि संकट अब तेज़ी से बढ़ेगा।
इस वक़्त सबसे बड़ी जरूरत है कि मज़दूरो, मेहनतकशों, युवाओं को, बूर्जुआ दक्षिणपंथ के विरुद्ध, एक स्वतंत्र लेफ्ट ब्लॉक में संगठित किया जाय।
लेफ्ट ब्लॉक् का कांसेप्ट, सबसे ऊपर, वाम एकता के लिए, भारत के करोड़ों-करोड़ मज़दूरों, मेहनतकशों, और कम्युनिस्ट युवाओं की दशकों से मौजूद, गहनतम आकांक्षाओं को मूर्तरूप देता है। यह उन सभी तत्वों का सांझा मोर्चा है जो समाजवाद और क्रान्ति के आकांक्षी हैं मगर अभी दर्जनों पार्टियों और सैंकड़ों संगठनों में बंटे हैं और इसलिए पूंजीवाद-फासीवाद के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई करने में असमर्थ हैं। यह वाम ट्रेड-यूनियनों, छात्र और युवा संगठनों, महिला संगठनों और दसियों करोड़ असंगठित मेहनतकशों का मोर्चा है, जो बड़े शहरों से लेकर गांव-देहात तक बिखरे हुए हैं।
http://workersocialist.blogspot.com/2018/06/2019.html
_______________________
प्रश्न- जिस लेफ्ट ब्लॉक् की आप बात कर रहे हैं, उसका कांसेप्ट क्या है?
उत्तर- पूंजीवाद की ढहती-गिरती राजनीतिक व्यवस्था को, फासिस्टों ने चार साल किसी तरह सहारा दिए रखा। अब वे चुक गए हैं। उपचुनावों के नतीजे बता रहे हैं कि संकट अब तेज़ी से बढ़ेगा।
इस वक़्त सबसे बड़ी जरूरत है कि मज़दूरो, मेहनतकशों, युवाओं को, बूर्जुआ दक्षिणपंथ के विरुद्ध, एक स्वतंत्र लेफ्ट ब्लॉक में संगठित किया जाय।
लेफ्ट ब्लॉक् का कांसेप्ट, सबसे ऊपर, वाम एकता के लिए, भारत के करोड़ों-करोड़ मज़दूरों, मेहनतकशों, और कम्युनिस्ट युवाओं की दशकों से मौजूद, गहनतम आकांक्षाओं को मूर्तरूप देता है। यह उन सभी तत्वों का सांझा मोर्चा है जो समाजवाद और क्रान्ति के आकांक्षी हैं मगर अभी दर्जनों पार्टियों और सैंकड़ों संगठनों में बंटे हैं और इसलिए पूंजीवाद-फासीवाद के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई करने में असमर्थ हैं। यह वाम ट्रेड-यूनियनों, छात्र और युवा संगठनों, महिला संगठनों और दसियों करोड़ असंगठित मेहनतकशों का मोर्चा है, जो बड़े शहरों से लेकर गांव-देहात तक बिखरे हुए हैं।
