-वर्कर सोशलिस्ट/ २५.१.२०१५
स्तालिनवाद और माओवाद की पैरोकार पंजाबी पत्रिका ‘प्रतिबद्ध’ और हिंदी
‘दिशासंधान’ में छपे एक लेख में दावा किया गया है कि लीओन ट्रोट्स्की द्वंद्ववाद
की यांत्रिकी को नहीं समझता था और कि वह क्रान्तिकारी नहीं, बल्कि कठमुल्ला था.
ट्रोट्स्की की इस मानसिक दुर्बलता का बखान करते हुए, ‘प्रतिबद्ध’ और 'दिशासंधान’ का
कहना है कि: