२८ नवम्बर के एक दिवसीय भारत-बंद के पाखण्ड को
निर्णायक संघर्ष की ओर मोड़ो!
साथियो,
८ नवम्बर को भारत की पूंजीवादी-फासीवादी सरकार
ने नोटबंदी की घोषणा करके, मेहनतकश और गरीब जनता को बदहाली के मुंह में धकेल दिया
है. काम-धंधे, रोजगार सब चौपट कर दिए गए हैं. पूरी नीति को इस तरह तैयार और लागू किया
गया है कि उसका सारा बोझ गरीब, मेहनतकश जनता के ऊपर पड़ा है और इसका सारा लाभ बड़े
बैंक और बैंकर समेट रहे हैं.
भगवा सरकार के इस कदम के खिलाफ, पहले ही दिन
से, जनता में जबरदस्त आक्रोश फैला हुआ था. मगर विपक्ष की पार्टियों ने, खासतौर से
झूठे वामियों, स्तालिनवादियों ने, इस आक्रोश को बड़ी चालाकी से ठंडा हो जाने दिया.
उन्होंने जानबूझकर नोटबंदी के खिलाफ प्रतिरोध को संसद में दोगली और खोखली बहसों तक
सीमित रखते हुए उफ़ान को उतर जाने दिया. अब अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को
दिखावे भर के लिए ये पार्टियां एक दिन के भारत बंद का आयोजन कर रही हैं. इस बेदम प्रतिरोध
को एक दिन तक सीमित रखने की घोषणा करके छद्म वामियों ने अपनी नीयत साफ़ कर दी है कि
उनका उद्देश्य पूंजीवाद के विरुद्ध कोई कारगर संघर्ष करना या उसे नुकसान पहुंचाना नहीं
है, बल्कि वे सिर्फ विरोध की नौटंकी भर कर रहे हैं.