-वर्कर्स
सोशलिस्ट पार्टी/ 25.1.2015
रेवोलुशनरी कम्युनिस्ट लीग ऑफ़ इंडिया (आर.सी.एल.आई.) के मुखपत्र, ‘दिशासंधान’ (हिंदी) और प्रतिबद्ध (पंजाबी) में छपे लेख “सोवियत समाजवादी
प्रयोग और समाजवादी संक्रमण की समस्याएं: इतिहास और सिद्धान्त की समस्याएं”
में ट्रोट्स्की और ‘सतत क्रांति’ के सिद्धांत को इस तरह निशाना बनाने की कोशिश की गई है कि असावधान पाठक, लेखक के अपने भ्रमों और झूठ को अनायास ही आत्मसात कर ले. ट्रोट्स्की की आलोचना
करते, लेख में एस.यू.सी.आई और बंगाल के ग्रुपों से हवाले दिए
गए हैं, मगर भारत और पूरे दक्षिण एशिया में ट्रोट्स्की और उसके कार्यक्रम की प्रमुख पैरोकार, ‘वर्कर्स सोशलिस्ट पार्टी’ को जानबूझकर अनदेखा कर
दिया गया है. इसका कारण यह है कि वर्कर्स सोशलिस्ट पार्टी ने इसी अभिनव द्वारा
हस्ताक्षरित और ‘प्रेक्सिस कलेक्टिव’ नाम
से सक्रिय आर.सी.एल.आई के ही दो लेखों की आलोचना करते हुए, छह
लेखों की श्रृंखला के माध्यम से, ट्रोट्स्की और अक्टूबर
क्रांति बारे इस पार्टी द्वारा फैलाये जा रहे झूठ और भ्रमों को नंगा कर दिया था,
जिसका उत्तर इन्होने आज तक नहीं दिया. हमारे लेखों की इस श्रृंखला
के बारे में जानकारी रखते हुए भी यह पार्टी उन्हें अपने कार्यकर्ताओं की नज़रों से
ओझल रखना चाहती है. श्रृंखला का लिंक यह है: http://workersocialist.blogspot.in/2013/04/against-schema-of-dictatorship.html