- अनुराग पाठक एवं राजेश त्यागी/ २९.३.२०१८
झारखण्ड विधानसभा से राज्यसभा की दो सीटों के लिए, इस सप्ताह हुए मतदान में, स्तालिनवादी वाम की दो पार्टियों, भाकपा माले और मार्क्सवादी समन्वय समिति (मासस) के एकल विधायकों द्वारा किए गए कुटिल मतदान ने, सीधे भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में संतुलन बना दिया.
राजधनवार से माले के विधायक राजकुमार यादव और निरसा से मासस के अरूप चटर्जी पर भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में कुटिलता से वोट प्रयोग करने और उनकी जीत में मदद पहुंचाने के सीधे आरोप के बाद, इन दोनों विधायकों ने अपने फ़र्जी स्पष्टीकरण रखे.
झारखण्ड विधानसभा से राज्यसभा की दो सीटों के लिए, इस सप्ताह हुए मतदान में, स्तालिनवादी वाम की दो पार्टियों, भाकपा माले और मार्क्सवादी समन्वय समिति (मासस) के एकल विधायकों द्वारा किए गए कुटिल मतदान ने, सीधे भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में संतुलन बना दिया.
राजधनवार से माले के विधायक राजकुमार यादव और निरसा से मासस के अरूप चटर्जी पर भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में कुटिलता से वोट प्रयोग करने और उनकी जीत में मदद पहुंचाने के सीधे आरोप के बाद, इन दोनों विधायकों ने अपने फ़र्जी स्पष्टीकरण रखे.
जहां माले विधायक ने इसे वोट डालने में ‘गलती’ बताते हुए अपना बचाव किया, मासस विधायक ने इससे इंकार करते हुए और भी हास्यास्पद खुलासा किया कि उसने अपना वोट, भाजपा नहीं, कांग्रेस के धीरज प्रसाद साहू के पक्ष में दिया था.
चटर्जी ने राष्ट्रपति और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को अपना वोट सार्वजनिक करने के लिए आवेदन भी किया है. यह जानते हुए भी कि विधायक का वोट सार्वजनिक करने का अधिकार सिर्फ विधानसभा अध्यक्ष का है, चटर्जी ने जानबूझकर उसे अब तक कोई निवेदन नहीं दिया है.
चटर्जी ने राष्ट्रपति और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को अपना वोट सार्वजनिक करने के लिए आवेदन भी किया है. यह जानते हुए भी कि विधायक का वोट सार्वजनिक करने का अधिकार सिर्फ विधानसभा अध्यक्ष का है, चटर्जी ने जानबूझकर उसे अब तक कोई निवेदन नहीं दिया है.