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Wednesday, 24 June 2015

इंडोनेशिया में क्रांति का दमन और स्तालिनवादी PKI


रूस और चीन के बाद, यह इंडोनेशिया का क्रान्तिकारी सर्वहारा था, जो अक्टूबर १९६५ में स्तालिनवादियों की गद्दारी का शिकार हो, बूर्ज्वाजी के हाथ पराजित हुआ.

सर्वहारा को, इस पराजय की बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी. दस लाख कम्युनिस्ट कार्यकर्त्ता और अग्रणी मजदूर, सुकार्नो-सुहार्तो के नेतृत्व वाले क्रांतिविरोधी गठजोड़ के हाथों मौत के घाट उतार दिए गए और दसियों हज़ार को जेलों में अमानवीय यातनाएं दी गईं. अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए द्वारा निदेशित इस कत्लेआम ने, इंडोनेशिया की सत्ता, बर्बर सैनिक तानाशाही को सौंप दी, और विश्व-सर्वहारा की एक बार फिर कमर तोड़ दी.

क्रांति-विरोधियों ने इस कत्लेआम की लम्बे समय तैयारी की थी और इंडोनेशिया की कम्युनिस्ट पार्टी (PKI) के स्तालिनवादी नेतृत्व ने इसमें विषैली, क्रांति-विरोधी भूमिका अदा की थी.

इंडोनेशिया में प्रतिक्रांति के हाथों क्रांति की इस पराजय के समय, इंडोनेशिया की कम्युनिस्ट पार्टी (PKI), अपने आकार में, रूस और चीन के बाद दुनिया भर में तीसरे स्थान पर थी. इसके ३५ लाख सदस्य थे और इससे जुड़े युवा संगठन के ३० लाख सदस्य अलग. इसके ट्रेड यूनियन संगठन SOBSI में ३५ लाख और किसान संगठन BTI में ९० लाख सदस्य थे. इसके अलावा महिला, लेखक, बुद्धिजीवी और कला संगठनों में भी २ करोड़ से अधिक सदस्य थे.