साथियो,
एक तरफ पूंजी की व्यवस्था के गहराते आर्थिक-राजनीतिक संकट और दूसरी तरफ सर्वहारा के संघर्षों की फिर से उठती हुई लहर के चलते, बड़े पूंजीपति-कॉर्पोरेट, सत्ता के दमनचक्र को और नृशंस बनाने की तैयारी कर रहे हैं. इस तैयारी के चलते ही ये सब, फासिस्ट संघ परिवार और शिव सेना जैसे फासिस्ट ताकतों की तरफ तेज़ी से मुड़ रहे हैं, जबकि फासिस्ट ताकतें पूँजी के मालिकों को मेहनतकशों की लूट और दमन को और भी तेज़ करने का भरोसा दे रही हैं. सर्वहारा के आन्दोलनों से निपटने के लिए, ये फासिस्ट, खुलेआम सार्वजानिक शाखाओं के जरिये, अर्धसैनिक प्रशिक्षण ले रहे हैं. गुजरात में, वर्ष २००२ में, इन फासिस्टों ने गरीब मेहनतकश जनता का सामूहिक-सांप्रदायिक नरसंहार करके अपनी वहशी ताकत दिखा दी थी. मुम्बई में भी शिव सेना ने सर्वहारा को कुचल डाला है, और पूँजी के राज को संरक्षण दिया है. बड़े पूंजीपतियों द्वारा समर्थित ये फासिस्ट, अब मोदी के नेतृत्व में दिल्ली में केंद्र सरकार पर कब्ज़ा करने और बचे-खुचे पूंजीवादी जनतंत्र के ढांचे को भी नष्ट करके पूंजी की नंगी तानाशाही स्थापित करने का मंसूबा बना रहे हैं.