राजेश त्यागी/ १५.७.२०१५
७८ वर्ष पूर्व, स्पेन में, सफलता की दहलीज़ पर खड़ी सर्वहारा क्रांति को स्पेनिश
बूर्ज्वाजी ने स्टालिन और उसके तहत सोवियत सत्ता की मदद से कुचलकर फासिस्ट
प्रतिक्रांति के लिए रास्ता साफ़ कर दिया. क्रांति पर स्तालिनवादी दमन के चलते, १९३९ में सैनिक तख्तापलट के जरिये सत्ता
में आने के लिए जनरल फ्रेंको को हाथ भी नहीं हिलाना पड़ा.
इससे पहले चीन, ब्रिटेन, और जर्मनी में हुई शर्मनाक असफलताओं के लिए स्तालिनवादी
मुख्य रूप से उत्तरदायी थे, मगर यह स्पेनिश क्रांति थी जिसमें स्तालिनवादी, पहली बार क्रांति के खिलाफ खुलकर सामने आए. स्पेनिश क्रांति ने स्टालिनवाद के क्रांति-विरोधी चरित्र को नंगा कर
दिया.
इसके अलावा स्टालिन द्वारा प्रतिपादित ‘जनमोर्चे’ (पॉपुलर फ्रंटिज्म) की बोगस
नीति, जो सर्वहारा को बूर्ज्वाजी की पूंछ से बांधती है, का भी, स्पेन की क्रांति
ने, पूरी तरह खुलासा कर दिया.