-वर्कर सोशलिस्ट/ २ मई २०१५
नेपाल में आए भूकंप में करीब
६७०० जानें जा चुकी हैं और लगभग पंद्रह हज़ार घायल हुए हैं. मलबे के हटने के साथ यह
आंकड़ा बढ़ता जा रहा है और लोगों के जिन्दा बचने की आशा भी ख़त्म हो रही है.
नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील
कोइराला का कहना है कि मरने वालों की तादाद दस हज़ार से ऊपर जा सकती है. इसका अर्थ
होगा कि यह भूकंप, १९३४ में नेपाल में आए अब तक के सबसे बड़े भूकंप में ८५०० लोगों
की मौत के आंकड़े को भी, पार कर जायेगा.
राजधानी काठमांडू सहित, नेपाल के पचहत्तर जिलों में
से पश्चिमी नेपाल के लगभग चालीस जिले, भूकंप की चपेट में आए हैं.
२५ अप्रैल, शनिवार को दोपहर
के समय आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर ७.८ मापी गई, जिसका केन्द्रक नेपाल
की राजधानी, काठमांडू से ८० किलोमीटर पश्चिम में था. शनिवार को लगभग १२ छोटी-बड़ी
कम्पन हुईं और अगले दिन रविवार को फिर ६.७ तीव्रता का भूकंप आया. इस भूकंप का विस्तार
भारत में दिल्ली तक था, जहां बिहार और उत्तर प्रदेश में ७२ लोगों के मारे जाने की
सूचना है. भारत के अतिरिक्त भूटान और बांग्लादेश में भी भूकंप से कई जानें गईं.
माउन्ट एवरेस्ट पर १८ टूरिस्ट और पर्वतारोही हिमस्खलन के शिकार हुए, जबकि ६० से
ज्यादा घायल हुए. ऐतिहासिक महत्त्व की कितनी ही महत्वपूर्ण इमारतें ज़मींदोज़ हो
गईं. भूकंप से कुल नुकसान करीब सात हज़ार करोड़ से अधिक का बताया जा रहा है.
