स्तालिनवादी भाकपा माले (लिबरेशन) द्वारा दिल्ली विधानसभा चुनावों में, आम आदमी पार्टी को समर्थन की घोषणा की गई है. यह घोषणा ऐसे वक़्त पर हुई है जबकि आम आदमी पार्टी पर कॉर्पोरेट से करोड़ों रुपये चंदा लेने के मामले खुलकर सामने आ रहे हैं और इस पार्टी ने बड़े कॉर्पोरेट के खिलाफ बोलना तक बंद कर दिया है. निम्न-बूर्ज्वा सुधारवादी आम आदमी पार्टी को इस समर्थन पर भाकपा माले के नेता फर्जी बहाने बनाकर अपने कार्यकर्ताओं को बहकाने का प्रयास कर रहे हैं. इस विषय को स्पष्ट करती यह प्रश्नोत्तरी देखें:
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प्रश्न: भाकपा माले (लिबरेशन) ने दिल्ली विधान-सभा चुनावों में ‘आम आदमी
पार्टी’ को समर्थन दिया है. इस पर आपका क्या मत है?
वर्कर-सोशलिस्ट: यह उन युवाओं और सर्वहारा, मेहनतकश हिस्सों से खुली गद्दारी
है जो भाकपा माले का समर्थन करते हैं. स्तालिनवादी वाम मोर्चे की दूसरी पार्टियों की तरह ही, भाकपा माले (लिबरेशन) के स्तालिनवादी नेता भी बूर्ज्वा पार्टियों, मोर्चों की पूंछ पकड़ने के लिए उत्सुक हैं और सर्वहारा की राजनीतिक स्वतंत्रता, क्रांति और समाजवाद की ओर पीठ किये खड़े हैं. ये पार्टियां स्टालिनवाद के जिस कार्यक्रम पर आधारित हैं वास्तव में वह निम्न-बूर्ज्वा सुधारवाद का कार्यक्रम है, क्रांति का नहीं. हम इस घात की कड़ी निंदा करते हुए, युवाओं और सर्वहारा के अग्रणी तत्वों का आह्वान करते हैं कि वे इन क्रांति-विरोधियों से नाता तोड़ें और सर्वहारा की राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते हुए, अक्टूबर क्रांति की राह पर आगे बढ़ें.