वोटर लिस्ट शोधन के मुद्दे पर जारी, भारी विरोध के बीच, मोदी सरकार ने १३ अगस्त से स्थगित, संसद का मानसून सत्र बुलाने का प्रस्ताव किया है. सरकार ने विपक्ष को चेतावनी भी दी है कि वह इस सत्र के कामकाज में बाधा न डाले. मोदी सरकार, इस सत्र में विशेष रूप से परिसीमन संशोधन बिल लाकर, लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन करते हुए, लोकसभा में सीटों की संख्या को ५५० से ८५० करना चाहती है.
दरअसल, महिला आरक्षण कानून, जो संसद में महिलाओं के लिए ३०% सीटों की व्यवस्था करता है, २०२६-२७ की उसी जनगणना से जुड़ा है, जो नए परिसीमन बिल का भी आधार तय करती है. १९७६ से संसद की सीटें ५५० पर फ्रीज हैं. बढ़ी आबादी के दृष्टिगत, २००१ में इनमें बदलाव होना था, मगर वर्ष २००१ में इसे २०२६ के बाद जनगणना तक स्थगित कर दिया गया था. २०२६ में शुरू हुई जनगणना और वोटर लिस्ट में भारी हेराफेरी के आरोपों के बीच परिसीमन कानून भी विरोध के निशाने पर है. मानसून सत्र में परिसीमन बिल लाकर मोदी सरकार, एक तरफ तो वोटर लिस्ट शोधन के मुद्दे पर जारी विरोध से ध्यान हटाना चाहती है और दूसरे महिला आरक्षण का सेहरा अपने सर बांधने और विपक्ष पर इसका विरोध करने का आरोप मढ़ना चाहती है.






