वर्कर्स सोशलिस्ट पार्टी / १३ जून २०१३
यह लेख, ‘शहीद भगत सिंह दिशा मंच’ की ओर से, उसके स्वयंभू स्तालिनवादी नेता श्यामसुंदर द्वारा प्रकाशित दो लेखों, ‘कलायत बहस जारी रहे’ (२८.०९.२०१२) और ‘कलायत बहस के निष्कर्ष में’ (१८.१०.२०१२), में क्रान्तिकारी मार्क्सवाद और अक्टूबर क्रांति की शिक्षाओं को विकृत करने के प्रयासों के विरुद्ध निर्देशित है. ये दोनों लेख श्यामजी ने एक अन्य स्तालिनवादी ग्रुप ‘प्रेक्सिस कलेक्टिव’ के साथ बहस में लिखे थे.
यह लेख, ‘शहीद भगत सिंह दिशा मंच’ की ओर से, उसके स्वयंभू स्तालिनवादी नेता श्यामसुंदर द्वारा प्रकाशित दो लेखों, ‘कलायत बहस जारी रहे’ (२८.०९.२०१२) और ‘कलायत बहस के निष्कर्ष में’ (१८.१०.२०१२), में क्रान्तिकारी मार्क्सवाद और अक्टूबर क्रांति की शिक्षाओं को विकृत करने के प्रयासों के विरुद्ध निर्देशित है. ये दोनों लेख श्यामजी ने एक अन्य स्तालिनवादी ग्रुप ‘प्रेक्सिस कलेक्टिव’ के साथ बहस में लिखे थे.
हमने बहस में दखल दिया, चूंकि इन दोनों ग्रुपों ने, एक दूसरे के विरुद्ध इस बहस में न सिर्फ अक्टूबर क्रांति और उसके महान नेताओं, लेनिन और ट्रोट्स्की, की शिक्षाओं को धुंधला, बल्कि कलंकित किया है. एक-दूसरे के ख़िलाफ़ निंदनीय शब्दावली के प्रयोग के अलावा, इन्होने मनमाने ढंग से, बिना पढ़े-समझे ही अपने पूर्वाग्रहों को इन नेताओं पर मढ़ने का कुत्सित प्रयास किया है.