हिंदी अनुवाद: रजिंदर, कल्पेश डोबरिया
मायावती से पासवान तक, और ढसाल से जीतन राम तक, सभी अंबेडकरवादियों का पूंजीवाद और उसकी राजनैतिक सत्ता के आज्ञाकारी दलालों के तौर पर पर्दाफाश हो गया है। उनकी विश्वासघाती भूमिका, गरीबों और वंचितों के लिए उनकी झूठी लफ्फाजी के बावजूद, गरीबों और निम्न जातियों की जनता के तबकों को अमीरों और अभिजातों की सत्ता के पीछे बांधने में ही निहित है।
यहां हम उन प्रमुख मुद्दों को रेखांकित कर रहे हैं, जो हम क्रान्तिकारी मार्क्सवादियों और अम्बेडकरवादियों के बीच विवाद के सार को इंगित करेंगे-