वर्कर्स सोशलिस्ट
पार्टी द्वारा जारी विज्ञप्ति
२ जून २०१४
भगाना से बदायूं तक जघन्य अपराधों की अटूट श्रृंखला यह इंगित कर रही है कि अपराध, अपवाद न रहकर, सामाजिक जीवन का नित्यक्रम बन चुके हैं. कहने की जरूरत नहीं कि समाज के सबसे कमजोर हिस्से- औरतें, बच्चे, दलित इन अपराधों का शिकार बन रहे हैं.
अपराधों को रोकने
में नाकाम पूंजीवादी सरकारें, पार्टियां और नेता इन अपराधों को एक-दूसरे को लांछित
करने और अपने वोट-बैंक का विस्तार करने के अवसर के रूप में देख रहे हैं.
इस सबके चलते, पूंजीपतियों
के नेतृत्व वाले, समूचे राज्य-तन्त्र का अपराधीकरण हो गया है. पूंजी की सत्ता बहुत
पहले ही अपराधियों के हाथ जा चुकी है. पूंजीपतियों की यह सत्ता, जिसे वे झूठमूठ ही
लोकतंत्र बताते हैं, उसे अपराधी चला रहे हैं. ऊपर से नीचे तक, अपराधियों का एक जाल
इस सत्ता पर काबिज है.