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Wednesday, 3 October 2018

किसान आन्दोलन, पूंजीवाद के फैलते संकट की पूर्व-चेतावनी है!

- रामेश्वर दत्ता, आशीष देवराड़ी, / ३.१०.२०१८

कल २ अक्टूबर को, गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश के रास्ते, दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जुट रहे किसानों को, पूर्वी दिल्ली के पास गाजीपुर बॉर्डर पर रोकने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसमें कई किसानों को चोटें आई हैं. ‘किसान क्रांति यात्रा’ के बैनर तले, दस दिन के किसान मार्च के अंतिम दिन यह प्रदर्शन, दिल्ली में किसान घाट पर आयोजित होना था. इस यात्रा में, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित, देश के कई राज्यों से किसान शामिल थे.

भारत के इलीट शासक, २ अक्टूबर को, दशकों से 'अहिंसा दिवस' के रूप में प्रचारित करते रहे हैं, जो भारतीय बुर्जुआजी के सर्वमान्य नेता महात्मा गांधी का जन्मदिवस है. किसानों के विरुद्ध यह हिंसा, गांधी और उसके चेलों के झूठ और पाखंड का खुलासा करता है. उनकी अहिंसा सिर्फ मेहनतकश जनता को संघर्ष से रोकने और शोषण, दमन के खिलाफ उसे निशस्त्र और नपुंसक बनाने तक ही सीमित है.