Showing posts with label फासीवाद विरोधी संयुक्त मोर्चे का प्रश्न और हमारे कार्यभार. Show all posts
Showing posts with label फासीवाद विरोधी संयुक्त मोर्चे का प्रश्न और हमारे कार्यभार. Show all posts

Sunday, 25 March 2018

फासीवाद विरोधी संयुक्त मोर्चे का प्रश्न और हमारे कार्यभार

- राजेश त्यागी/ २४.३.२०१८ 

इस दौर में, जबकि दशकों से दक्षिणपंथ की ओर झुकते बुर्जुआ गणतंत्र, फासीवाद को स्वेच्छा से रास्ता दे रहे हैं, फासीवाद के विरुद्ध संघर्ष, सर्वहारा क्रान्ति के एजेंडे पर सर्वोच्च स्थान ले लेता है.

फासीवाद से लड़ने का प्रश्न, नया नहीं है. इसका अपना एक सदी से अधिक का इतिहास है और उस इतिहास के ठोस अनुभव भी हैं. साथ ही जो परिस्थितियां आज मौजूद हैं, जिनके भीतर इस प्रश्न से हम जूझ रहे हैं, वे अपनी विशिष्टता लिए हुए हैं. कल और आज के बीच एक लय है, एक निरंतरता है, बावजूद इसके कि हर परिप्रेक्ष्य अपनी विलग विशिष्टता लिए है. इसलिए इतिहास के संघर्षों से रणनीतिक निष्कर्ष निकालते हुए, हमें आज के ठोस सन्दर्भ में इस प्रश्न को हल करना है.

आज के विशिष्ट राजनीतिक सन्दर्भ में जिन बिन्दुओं को दृष्टिगत रखने की जरूरत है, उनमें सबसे पहले तो विश्व परिप्रेक्ष्य है जिसमें, जैसा हमने ऊपर कहा कि दशकों से गल-सड़ रहे और दक्षिण की ओर झुकते जा रहे बुर्जुआ गणतंत्र, फासीवाद को स्वेच्छा से राह दे रहे हैं. फासीवाद का उभार, राष्ट्रीय नहीं, अंतर्राष्ट्रीय परिघटना है.