Showing posts with label माओवादियों से हमारे मतभेदों के प्रश्न पर. Show all posts
Showing posts with label माओवादियों से हमारे मतभेदों के प्रश्न पर. Show all posts

Thursday, 27 July 2017

माओवादियों से हमारे मतभेदों के प्रश्न पर

-राजेश त्यागी/ ९.५.२०१०
अनुवाद- कल्पेश डोबरिया 

माओवाद के विरुद्ध अपने संघर्ष में हम सबसे पहले यह स्वीकार करते हैं कि कई ऐसे ईमानदार और प्रतिबद्ध कार्यकर्ता, माओवादी आंदोलन की कतारों में मौजूद हैं जो अपने चारों ओर व्याप्त और निरंतर जारी अन्याय को खत्म करने की इच्छा से अनुप्रेरित हैं। लेकिन साथ ही हम यह भी जोड़ना चाहते हैं कि समाज के क्रान्तिकारी रूपांतरण के लिए, सिर्फ़ ऐसी प्रेरणाएं ही पर्याप्त नहीं हैं, और वे सामाजिक वास्तविकताओ के लिए गंभीर और वैज्ञानिक समझ के विकास का, कोई विकल्प प्रस्तुत नहीं कर सकतीं।

स्टालिनवाद के चीनी संस्करण, माओवाद में, क्रांतिकारी मार्क्सवाद जैसा कुछ नहीं है। स्तालिनवादियों के साथ मिलकर, उन्होंने पिछड़े देशों में युवाओ और मज़दूरो की पीढ़ियों को गलत शिक्षा देकर दिग्भ्रमित किया है और उन्हें क्रांति के पथ पर आगे बढ़ने से रोका है।